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बाबा फरीद लिटरेचर मेला यादगार यादें छोड़कर हुआ संपन्न

बाबा शेख फरीद की जयंती के मौके पर भाषा विभाग पंजाब ने वर्ल्ड पंजाबी अदब फाउंडेशन (रजिस्टर्ड) फरीदकोट, देश भगत पंडित चेतन देव गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ एजुकेशन, फरीदकोट, डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन फरीदकोट और महात्मा गांधी मेमोरियल सीनियर सेकेंडरी स्कूल फरीदकोट के साथ मिलकर पांच दिन का बाबा फरीद लिटरेचर फेस्टिवल यादगार यादें छोड़कर पूरा किया। फेस्टिवल का उद्घाटन MLA स. गुरदित सिंह सेखों ने किया।

इस मौके पर फरीदकोट के डिप्टी कमिश्नर राहुल चाबा, एडिशनल डिप्टी कमिश्नर केशव गोयल, गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ एजुकेशन के प्रिंसिपल राजेश मोहन, मार्केट कमेटी फरीदकोट के चेयरमैन अमनदीप सिंह बाबा, मशहूर पंजाबी कवि विजय विवेक और डिस्ट्रिक्ट भाषा ऑफिसर मनजीत पुरी भी मौजूद थे। उद्घाटन समारोह करते हुए गुरदित सिंह सेखों ने इंसानी ज़िंदगी में किताबों की अहमियत पर रोशनी डाली और लोगों को ज्यादा से ज्यादा लिटरेचर पढ़ने के लिए प्रेरित किया।

डिप्टी कमिश्नर राहुल चाबा ने लिटरेचर पढ़ने के अपने अनुभव शेयर किए। डिस्ट्रिक्ट लैंग्वेज ऑफिसर मंजीत पुरी ने इस मेले का इतिहास बताते हुए इसे मालवा का सबसे बड़ा बुक फेयर बताया, जिसमें हर बार सैकड़ों नई किताबें रिलीज होती हैं। इस बार मेले में करीब 75 पब्लिशर्स ने हिस्सा लिया है। जसबीर जस्सी ने स्टेज मैनेजर की भूमिका निभाई। पहले सेशन कथा-कारवां में गुरमीत करियालवी ने पंजाबी कहानियों की जानी-मानी हस्तियों बलविंदर ग्रेवाल और जतिंदर हंस से बातचीत की। पंजाबी कहानियों के कई पहलुओं पर खुली चर्चा हुई।

शाम के सेशन में यूथ लिटरेचर, युवा कहानीकार आगाजबीर और साहित्य अकादमी यूथ अवॉर्ड विनर कवि रणधीर के साथ युवा विचारक प्रो. गुरदीप सिंह ढिल्लों ने एक डायलॉग बनाया, जिसमें आज के दौर में लिटरेचर में बदलते दौर का गहराई से एनालिसिस पेश किया गया। दूसरे दिन सुबह के सेशन में अवतार सिंह औलख ने मशहूर नॉवेलिस्ट डॉ. गुरमिंदर सिंह रूपोवाली के साथ ‘देह की साखी’ टाइटल के तहत बातचीत की।

इस दौरान स. रूपोवाली ने सिख धर्म में मौजूद साखी परंपरा के बारे में कहा कि इतिहास और साखी परंपरा पैरेलल चलती हैं लेकिन दोनों का मुहावरा अलग है। इसलिए सिख धर्म में दोनों की बराबर जगह है। दोपहर के सेशन में ‘सिनेमा और कंटेंपररी’ टॉपिक के तहत भाषा डिपार्टमेंट के रिसर्च ऑफिसर डॉ. सुखदर्शन सिंह चहल ने मशहूर फिल्ममेकर जस ग्रेवाल के साथ बातचीत की। इस दौरान मिस्टर ग्रेवाल ने पंजाबी सिनेमा के अलग-अलग पहलुओं के बारे में बहुत साफ जवाब दिए।

इस मौके पर स. बाबू सिंह मान ने फरीदकोट से जुड़ी अपनी यादों को ताजा करते हुए अपने गीत लिखने के सफर की शुरुआत पर रोशनी डाली। चौथे दिन शाम के सेशन में कवि दरबार लगा। जिसमें राज्य के कोने-कोने से आए कवियों ने अलग-अलग विधाओं की अपनी काव्य रचनाओं से लिटरेचर फेस्टिवल को अपने मुकाम पर पहुंचाया। कवि दरबार की अध्यक्षता भाषा विभाग पंजाब के डायरेक्टर सरदार जसवंत सिंह जफर ने की। कवि और संगीतकार प्रिंस राजेश मोहन मुख्य मेहमान के तौर पर शामिल हुए, जिला भाषा अफसर फरीदकोट मंजीत पुरी ने मेहमानों का स्वागत किया। कवि दरबार में त्रैलोचन लोची, सिमरन अक्स, सुनील चंदियानवी, डॉ. देविंदर सैफी, बलकार औलाख, भूपिंदर कौर प्रीत, डॉ. अजीतपाल जटाना, नीतू, स्वामी अंतर नीरव, दर्शन बुट्टर, प्रिंस शामिल थे। राजेश मोहन, गुरतेज कोहरवाला, विजय विवेक आदि कवियों ने अपनी ओजस्वी कविताओं से समय बांधा।

साहित्य मेले का पांचवां दिन बेहद अलग एहसास से भरा रहा। अगले साल मिलने के वादे के साथ विदाई का समय नजदीक आ रहा था। इसी एहसास को शब्दों में बदलने के लिए एक भावुक विदाई समारोह का आयोजन किया गया जिसमें निंदर घुग्यानवी, नवदीप गिल, खेल लेखक जसबीर जस्सी, कंवरजीत सिंह सिद्धू, प्रो. राजेश मोहन, मंजीत पुरी ने हिस्सा लिया। इस इवेंट के ऑर्गनाइजर की भूमिका प्रो. रणजीत सिंह बाजवा ने अच्छे से निभाई।

EDITED BY- HARLEEN KAUR

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