
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिरता बरकरार रही, जब मंगलवार को शुरुआती कारोबार में रुपया 85.92 के स्तर पर बना रहा। विदेशी मुद्रा कारोबारियों के मुताबिक, डॉलर की कमजोरी और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद घरेलू मुद्रा में ज्यादा उछाल देखने को नहीं मिला। इसके पीछे की वजह विदेशों से पूंजी की निकासी और भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता को लेकर चल रही अनिश्चितता बताई जा रही है।
मंगलवार को अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 85.97 पर खुला और फिर 85.92 के स्तर पर स्थिर हो गया। यह स्तर पिछले कारोबारी दिन के समापन के बराबर था। सोमवार को रुपया 12 पैसे कमजोर होकर 85.92 पर बंद हुआ था।
वैश्विक बाजार में, डॉलर सूचकांक (DXY) में हल्की गिरावट देखी गई, जो 0.04 प्रतिशत घटकर 98.04 पर पहुंच गया। यह डॉलर की तुलना में छह प्रमुख मुद्राओं की स्थिति को दर्शाता है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में भी मामूली गिरावट आई है। ब्रेंट क्रूड 0.42 प्रतिशत गिरकर 68.92 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
भारत में घरेलू शेयर बाजारों में भी हल्की तेजी देखी गई। सेंसेक्स 203.95 अंकों की बढ़त के साथ 82,457.41 अंक पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 68.85 अंक चढ़कर 25,151.15 अंक पर पहुंचा। हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बिकवाली की, जिससे शुद्ध रूप से 1,614.32 करोड़ रुपये के शेयर बेचे गए।
विश्लेषकों का मानना है कि रुपया और शेयर बाजार में आगामी दिनों में वैश्विक घटनाक्रमों और भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों से असर पड़ सकता है। तेल की कीमतों और डॉलर की स्थिति में बदलाव के कारण घरेलू मुद्रा और बाजारों में उतार-चढ़ाव की संभावना बनी हुई है।




