
सनातन परंपरा में एकादशी व्रत का विशेष स्थान है, और कामदा एकादशी को अत्यंत फलदायी माना जाता है। बता दें कि कामदा एकादशी 29 मार्च, रविवार को मनाया जाएगा। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली यह एकादशी भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करने वाली मानी जाती है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष आराधना की जाती है।
क्या है कामदा एकादशी का महत्व?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कामदा एकादशी व्रत रखने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इसे “फलदा एकादशी” भी कहा जाता है, क्योंकि यह व्रत सभी इच्छाओं को पूर्ण करने वाला माना गया है। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि इस व्रत के प्रभाव से नकारात्मक योनियों से मुक्ति तक संभव है।
पूजा विधि कैसे करें?
कामदा एकादशी का व्रत विधिपूर्वक करने के लिए कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक है-
–व्रत से एक दिन पहले (दशमी तिथि) सात्विक भोजन करें और भगवान विष्णु का ध्यान करें।
–एकादशी के दिन प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
–पूजा स्थल पर दीपक जलाकर विष्णु और लक्ष्मी जी की आराधना करें।
–तुलसी दल, फल, फूल, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
–विष्णु जी को पीले फूल और लक्ष्मी जी को कमल या गुलाब अर्पित करना शुभ माना जाता है।
–लक्ष्मी मंत्र का 108 बार जाप करें और घी का दीपक प्रज्वलित रखें।
–प्रसाद में खीर, मखाने या सफेद मिठाई अर्पित करें।
–पूजा के दौरान व्रत कथा सुनना या पढ़ना लाभकारी माना गया है।
–एकादशी के दिन व्रत खोलने से पहले दान-पुण्य करें और ब्राह्मणों को भोजन कराएं।
इस दिन क्या करें?
–व्रत के दौरान फलाहार या निर्जल उपवास रखें (क्षमता अनुसार)।
–धार्मिक ग्रंथों जैसे गीता या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
–गरीबों और जरूरतमंदों को दान दें।
–रात्रि में भजन-कीर्तन और जागरण करना शुभ माना जाता है।
क्या न करें?
–इस दिन चावल, गेहूं, दाल, प्याज-लहसुन और मांसाहार से परहेज करें।
–झूठ बोलने, क्रोध करने या अपशब्दों का प्रयोग करने से बचें।
–किसी भी प्रकार की हिंसा या शरीर को क्षति पहुंचाने वाले कार्य न करें।
–भोजन की बर्बादी से बचें और अन्न का सम्मान करें।
कामदा एकादशी न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आत्मसंयम, श्रद्धा और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का भी संदेश देती है।
EDITED BY- HARLEEN KAUR




