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भारत में क्यों बढ़ रही है Vitamin D की कमी?

भारत में विटामिन डी की कमी लोगों में तेजी से बढ़ती जा रही है। देश की बड़ी आबादी इस जरूरी पोषक तत्व की कमी से प्रभावित है, जिससे हड्डियों की कमजोरी, थकान और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं।

विटामिन डी शरीर के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह हड्डियों, दांतों और मांसपेशियों को मजबूत बनाने के साथ-साथ इम्यून सिस्टम को भी बेहतर बनाता है। इसकी कमी लंबे समय में गंभीर बीमारियों जैसे डिप्रेशन और डायबिटीज के खतरे को भी बढ़ा सकती है।

क्यों बढ़ रही है विटामिन डी की कमी?

विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। आधुनिक जीवनशैली में लोग अधिकतर समय घर के अंदर बिताते हैं, जिससे धूप के संपर्क में कमी आती है। सूर्य की रोशनी विटामिन डी का सबसे प्राकृतिक स्रोत है, और इसकी कमी से शरीर में इसका निर्माण बाधित हो जाता है।

इसके अलावा अनियमित खान-पान, जंक फूड का बढ़ता सेवन और पोषक तत्वों की कमी भी इस समस्या को बढ़ा रहे हैं। जिन लोगों की त्वचा का रंग गहरा होता है, उनमें मेलेनिन की अधिकता के कारण विटामिन डी बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। मोटापा भी शरीर में इसके अवशोषण और निर्माण को प्रभावित करता है।

शरीर में कमी के संकेत

विटामिन डी की कमी कई तरह के लक्षणों के रूप में सामने आ सकती है। इनमें लगातार थकान, पीठ और हड्डियों में दर्द, बार-बार बीमार पड़ना और मूड स्विंग जैसी समस्याएं शामिल हैं। लंबे समय तक कमी रहने पर यह मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकती है।

कैसे पूरी करें कमी?

विशेषज्ञों के अनुसार जीवनशैली में छोटे बदलाव करके इस कमी को काफी हद तक पूरा किया जा सकता है। संतुलित आहार जिसमें अंडे, मछली, मशरूम, पनीर और डेयरी उत्पाद शामिल हों, विटामिन डी के अच्छे स्रोत हैं।

इसके अलावा रोजाना सुबह के समय कुछ देर धूप में रहना भी बेहद फायदेमंद होता है। गंभीर कमी की स्थिति में डॉक्टर की सलाह पर सप्लीमेंट्स या दवाओं का सेवन किया जाना चाहिए।

EDITED BY- HARLEEN KAUR

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