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हंसी सिर्फ खुशी नहीं सेहत के लिए भी है फायदेमंद?

समझिए कैसे

हंसना सिर्फ खुशी जाहिर करने का तरीका नहीं है बल्कि यह हमारे  शरीर और दिमाग पर भी सकारात्मक असर डाल सकता है। यही वजह है कि आजकल कई जगहों पर लाफ्टर क्लब भी चलाए जाते हैं, जहां लोग खुलकर हंसने की एक्सरसाइज करते हैं। लेकिन क्या सच में ज्यादा हंसने से शरीर को फायदा होता है या यह सिर्फ एक आम धारणा है?

विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य और स्वाभाविक रूप से हंसना  मानसिक और शारीरिक  स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है। हालांकि इसे किसी बीमारी का इलाज नहीं माना जा सकता।

हंसने पर शरीर में क्या होता है?
जब हम दिल खोलकर हंसते हैं, तो शरीर की कई मांसपेशियां एक साथ सक्रिय हो जाती हैं। सांस लेने की गति कुछ समय के लिए तेज हो जाती है और शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ता है। इसके साथ ही मस्तिष्क एंडोर्फिन (Endorphins) जैसे “फील-गुड” रसायन छोड़ता है, जो मन को अच्छा महसूस कराने में मदद करते हैं। इसी वजह से हंसने के बाद कई लोगों को हल्कापन और सुकून महसूस होता है।

क्या तनाव कम होता है?
कई अध्ययनों में पाया गया है कि हंसने से तनाव से जुड़े हार्मोन, जैसे कॉर्टिसोल (Cortisol) का स्तर कुछ समय के लिए कम हो सकता है। इसके साथ ही मूड बेहतर होता है और मानसिक तनाव कम महसूस हो सकता है। हालांकि इसका असर हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकता है।

क्या दिल के लिए भी फायदेमंद है?
कुछ रिसर्च बताती हैं कि हंसने से रक्त वाहिकाएं कुछ समय के लिए बेहतर तरीके से फैल सकती हैं जिससे रक्त संचार में सुधार हो सकता है। इसके अलावा तनाव कम होने का सकारात्मक असर हृदय स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है।

क्या इम्यून सिस्टम पर असर पड़ता है?
कुछ शोधों में यह संकेत मिले हैं कि सकारात्मक भावनाएं और हंसी शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) पर अच्छा प्रभाव डाल सकती हैं। हालांकि इस विषय पर अभी और शोध की जरूरत है और इसे किसी बीमारी से बचाव का निश्चित तरीका नहीं माना जा सकता।

क्या ज्यादा हंसना नुकसान भी पहुंचा सकता है?
सामान्य परिस्थितियों में हंसना सुरक्षित होता है। लेकिन अगर किसी व्यक्ति को हाल ही में सर्जरी हुई हो, पसलियों में चोट हो, गंभीर सांस की समस्या हो या कोई विशेष चिकित्सीय स्थिति हो, तो बहुत जोर से हंसने पर असहजता महसूस हो सकती है।

इसके अलावा लगातार और बिना किसी कारण के अनियंत्रित हंसना कुछ दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल या मानसिक स्वास्थ्य संबंधी स्थितियों का संकेत भी हो सकता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है।

EDITED BY- HARLEEN KAUR

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