
आज के डिजिटल दौर में छोटे बच्चों को मोबाइल या टैबलेट दिखाना कई परिवारों की रोजमर्रा की आदत बन चुका है। अक्सर माता-पिता बच्चे को खाना खिलाने, रोना शांत कराने या कुछ देर व्यस्त रखने के लिए स्क्रीन का सहारा लेते हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि दो साल से कम उम्र के बच्चों के लिए यह आदत उनके शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।
शुरुआती दो साल क्यों हैं सबसे अहम?
जन्म से लेकर दो वर्ष की उम्र तक का समय बच्चे के मस्तिष्क के तेजी से विकास का दौर होता है। इसी दौरान बच्चा बोलना, सुनना, चेहरे पहचानना, भावनाएं समझना और अपने आसपास की दुनिया से जुड़ना सीखता है। यदि इस अवधि में बच्चे का अधिक समय मोबाइल या अन्य डिजिटल स्क्रीन के सामने बीतता है, तो उसके प्राकृतिक सीखने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
भाषा और सामाजिक विकास पर पड़ सकता है असर
अत्यधिक स्क्रीन टाइम की वजह से बच्चे माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ कम संवाद कर पाते हैं। इससे उनकी भाषा सीखने की क्षमता, सामाजिक व्यवहार और संवाद कौशल के विकास में बाधा आ सकती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि बच्चों के लिए इंसानों के साथ बातचीत किसी भी स्क्रीन कंटेंट से कहीं अधिक लाभदायक होती है।
माता-पिता के साथ जुड़ाव हो सकता है कमजोर
बच्चे अपने शुरुआती वर्षों में माता-पिता के साथ बिताए गए समय से भावनात्मक सुरक्षा महसूस करते हैं। यदि उनकी दिनचर्या में स्क्रीन का समय अधिक हो जाए, तो परिवार के साथ बातचीत और खेलकूद का समय कम हो सकता है। इससे भावनात्मक जुड़ाव पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है।
नींद, आंखों और शारीरिक गतिविधियों पर प्रभाव
कम उम्र में लंबे समय तक स्क्रीन देखने से बच्चों की नींद की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। पर्याप्त नींद न मिलने से उनके विकास पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों पर दबाव बढ़ सकता है और शारीरिक गतिविधियां कम होने के कारण भविष्य में मोटापे का जोखिम भी बढ़ सकता है।
बच्चों के लिए क्या है बेहतर ऑप्शन?
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि दो साल से कम उम्र के बच्चों को नियमित रूप से मोबाइल, टैबलेट या अन्य डिजिटल स्क्रीन देने से बचना चाहिए। इसके बजाय उन्हें परिवार के साथ समय बिताने, खिलौनों से खेलने, कहानियां सुनने, गाने सुनने और प्राकृतिक वातावरण में नई चीजें देखने-समझने का अवसर देना अधिक फायदेमंद माना जाता है।
माता-पिता भी रखें अपनी आदतों पर ध्यान
बच्चे अपने आसपास के माहौल से बहुत जल्दी सीखते हैं। यदि माता-पिता हर समय मोबाइल में व्यस्त रहते हैं, तो बच्चे भी उसी व्यवहार को अपनाने लगते हैं। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि परिवार में स्क्रीन का संतुलित उपयोग करें और बच्चों के साथ अधिक से अधिक समय बातचीत, खेल और सीखने की गतिविधियों में बिताएं।
ध्यान देने वाली बात




