
आज सावन मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को पूरे देशभर में श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ नाग पंचमी का पावन पर्व मनाया जा रहा है। यह दिन न केवल सर्प पूजन के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि साथ ही मंगला गौरी व्रत और हनुमान पूजा के लिए भी शुभ माना गया है। आइए जानते हैं नाग पंचमी का महत्व, पूजा विधि और पूजन मुहूर्त-
नाग पंचमी हिंदू धर्म और वैदिक परंपराओं में विशेष स्थान रखती है। यह पर्व सिर्फ सर्पों के पूजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कुंडलिनी जागरण, नाड़ी तंत्र के संतुलन और प्राकृतिक शक्तियों के सम्मान का प्रतीक भी माना जाता है। इस दिन नागों की पूजा करने से न केवल सर्पदंश से रक्षा होती है, बल्कि कालसर्प दोष, नाग दोष और राहु-केतु के अशुभ प्रभाव भी शांत होते हैं। भगवान शिव के गले में विराजमान वासुकी नाग, भगवान विष्णु के शेषनाग, और अन्य प्रमुख नाग जैसे तक्षक, अनंत, कर्कोटक आदि को इस दिन विशेष रूप से पूजा जाता है।
नाग पंचमी 2025: तिथि और मुहूर्त
पंचमी तिथि प्रारंभ: 28 जुलाई 2025, रात 11:24 बजे
पंचमी तिथि समाप्त: 30 जुलाई 2025, सुबह 12:46 बजे
उदया तिथि के अनुसार पर्व: 29 जुलाई 2025, मंगलवार
पूजा के शुभ मुहूर्त:
प्रथम मुहूर्त: सुबह 5:41 बजे से 8:23 बजे तक
द्वितीय मुहूर्त: सुबह 8:30 बजे से दोपहर 12:15 बजे तक
आज के विशेष योग
इस वर्ष नाग पंचमी पर तीन महत्वपूर्ण शुभ योग बन रहे हैं:
शिव योग – जिससे पूजा का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है
रवि योग – आत्मबल और सकारात्मकता में वृद्धि करता है
सिद्ध योग – हर कार्य में सफलता का संकेत देता है
नाग पंचमी की पूजा विधि
1. ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और शुद्ध वस्त्र धारण करें।
2. पूजा स्थल या दीवार पर नाग देवता की आकृति हल्दी, कुमकुम या गेरू से बनाएं।
3. नागों को दूध, पुष्प, चावल, दूर्वा, लड्डू और सुगंध अर्पित करें।
4. धूप-दीप जलाकर आरती करें और नाग पंचमी की कथा पढ़ें या सुनें।
5. ब्राह्मणों को भोजन कराएं व दान-दक्षिणा दें।
6. निम्न मंत्रों का जप करें:
ॐ नमो नागराजाय नमः
ॐ नमो भगवते वासुकिनाथाय
ॐ नागराजाय नमः
ॐ कुरुकुल्ये हुं फट् स्वाहा




