
घर का बना खाना अक्सर शरीर के लिए दवा जैसा काम करता है, जबकि बाहर का खाना खाते ही सुस्ती और भारीपन महसूस होने लगता है। आपने भी गौर किया होगा कि बाहर का खाना खाने के बाद प्यास कुछ ज्यादा ही लगती है और बार-बार पानी पीने का मन करता है। इसकी वजह सिर्फ आदत नहीं, बल्कि खाने की बनावट और उसमें इस्तेमाल होने वाली चीजें हैं।
असल फर्क सोडियम यानी नमक का है। घर के खाने में नमक और तेल संतुलित मात्रा में होता है, जबकि बाहर के खाने में स्वाद बढ़ाने के लिए नमक काफी ज्यादा डाला जाता है। साथ ही, प्रोसेस्ड आटे और रिफाइंड तेल का इस्तेमाल भी आम बात है। जब शरीर में जरूरत से ज्यादा नमक पहुंचता है, तो फ्लुइड बैलेंस बिगड़ने लगता है। इसे ठीक करने के लिए शरीर ज्यादा पानी मांगता है और दिमाग को प्यास के संकेत भेजता है। यही वजह है कि बाहर का खाना खाने के बाद बार-बार प्यास लगती है।
दूसरी वजह है भारी और तला-भुना खाना। ऐसे भोजन को पचाने में शरीर को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। अगर खाने में तेल या प्रोटीन की मात्रा ज्यादा हो, तो पाचन प्रक्रिया के दौरान पानी की जरूरत भी बढ़ जाती है। यही कारण है कि बाहर का खाना खाने के बाद पेट भरा-भरा लगता है और प्यास बनी रहती है। यही अनुभव घर पर भी होता है, जब हम पूड़ी, पकौड़े या ज्यादा तले हुए व्यंजन खा लेते हैं।
अगर ऐसी स्थिति में बार-बार प्यास लगे, तो सिर्फ सादा पानी ही काफी नहीं होता। छाछ एक बेहतर विकल्प है। यह न सिर्फ प्यास बुझाती है, बल्कि पाचन को भी बेहतर बनाती है और पेट को हल्का महसूस कराती है। अगली बार बाहर का खाना खाने के बाद अगर ज्यादा प्यास लगे, तो पानी के साथ एक गिलास छाछ जरूर आजमाएं।




