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मानसून में स्वाद और सेहत का खजाना हैं ये फलों के अचार

जानिए इनके फायदे

मानसून का मौसम अपने साथ ताज़गी, हरियाली और ठंडक लेकर आता है, लेकिन इसी दौरान सर्दी-खांसी, वायरल इंफेक्शन और पाचन संबंधी समस्याएं भी बढ़ जाती हैं। ऐसे में खान-पान पर ध्यान देना बेहद जरूरी हो जाता है। इसी सीजन में जंगली फलों से बने पारंपरिक अचार न सिर्फ स्वाद बढ़ाते हैं, बल्कि सेहत के लिहाज से भी लाभकारी माने जाते हैं।

काफल अचार:

उत्तराखंड और हिमालयी क्षेत्रों में पाया जाने वाला काफल एक पारंपरिक जंगली फल है। इसका स्वाद खट्टा-मीठा होता है और इसमें प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। स्थानीय लोग इससे अचार और चटनी तैयार करते हैं, जो वहां की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है।

करौंदा अचार:

करौंदा एक खट्टा-मीठा जंगली फल है, जो विटामिन C से भरपूर माना जाता है। इसका अचार मानसून में खासतौर पर पसंद किया जाता है। कई लोग इसे पाचन के लिए भी फायदेमंद बताते हैं, जिससे भारी खाने के बाद राहत मिलती है।

जंगली बेर का अचार:

जंगली बेर का अचार ग्रामीण इलाकों में लंबे समय से बनाया जाता रहा है। इसका खट्टा-तीखा स्वाद खाने का स्वाद बढ़ा देता है। इसमें फाइबर और विटामिन C पाया जाता है, जो शरीर के लिए लाभकारी माना जाता है।

हिसालु अचार:

हिसालु पहाड़ी क्षेत्रों में पाया जाने वाला एक छोटा लेकिन पौष्टिक फल है। इसका अचार अपने अनोखे स्वाद और पोषक गुणों के कारण लोकप्रिय है। इसे ऊर्जा बढ़ाने में सहायक माना जाता है, जिससे यह मानसून में खास पसंद बन जाता है।

मानसून के दौरान इन जंगली फलों से बने अचार न सिर्फ भोजन को स्वादिष्ट बनाते हैं, बल्कि पारंपरिक खान-पान की विरासत को भी जीवित रखते हैं। करौंदा, काफल, हिसालु, जंगली बेर जैसे फलों के अचार भारतीय भोजन संस्कृति का अहम हिस्सा हैं, जो मौसम के साथ सेहत और स्वाद दोनों का संतुलन बनाए रखते हैं।

EDITED BY- HARLEEN KAUR

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