
हिंदू धर्म में सोमवार का दिन भगवान शिव की उपासना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा से भोलेनाथ प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। वहीं, धार्मिक ग्रंथों में कुछ ऐसे नियम भी बताए गए हैं जिनका पालन करना आवश्यक माना जाता है। इन नियमों की अनदेखी करने पर पूजा का पूर्ण लाभ प्राप्त नहीं होता। आइए जानते हैं सोमवार व्रत और शिव पूजा की विधि तथा किन बातों से बचना चाहिए-
ऐसे करें भगवान शिव की पूजा
सुबह स्नान कर करें पूजा की शुरुआत
सोमवार के दिन प्रातःकाल उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के मंदिर या शिवालय में जाकर भगवान शिव का स्मरण करें।
जलाभिषेक का महत्व
तांबे के पात्र में स्वच्छ जल या गंगाजल लेकर शिवलिंग पर अर्पित करें। माना जाता है कि जलाभिषेक से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
पंचामृत से करें अभिषेक
जल चढ़ाने के बाद दूध, दही, घी और शहद से बने पंचामृत से अभिषेक करें। इसके पश्चात पुनः साफ जल अर्पित करें।
प्रिय वस्तुएं अर्पित करें
शिवलिंग पर चंदन लगाएं और बेलपत्र, धतूरा, शमी पत्र तथा सफेद पुष्प अर्पित करें। ध्यान रखें कि बेलपत्र साफ और अखंड होना चाहिए।
मंत्रों का जाप
पूजा के दौरान “ॐ नमः शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र का जप करना शुभ माना जाता है। इससे मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
आरती और प्रसाद
पूजा के अंत में शिव आरती करें और भगवान को मिश्री या अन्य सफेद मिठाई का भोग लगाएं।
पूजा के समय इन गलतियों से बचें
हल्दी का प्रयोग न करें
शिवलिंग पर हल्दी अर्पित करना उचित नहीं माना जाता। इसके स्थान पर सफेद चंदन का उपयोग करना चाहिए।
तुलसी अर्पित न करें
भगवान शिव की पूजा में तुलसी दल चढ़ाने की परंपरा नहीं है। इसलिए शिवलिंग पर तुलसी अर्पित करने से बचें।
नारियल पानी से अभिषेक न करें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवलिंग पर नारियल पानी चढ़ाना शुभ नहीं माना जाता।
केतकी के फूल और सिंदूर से परहेज करें
भगवान शिव की पूजा में केतकी के फूल का उपयोग नहीं किया जाता। साथ ही शिवलिंग पर सिंदूर या कुमकुम भी नहीं चढ़ाया जाता।
शंख से जलाभिषेक न करें
अभिषेक के लिए तांबे या पीतल के पात्र का उपयोग करना बेहतर माना जाता है। शंख से शिवलिंग पर जल अर्पित करने से बचना चाहिए।
EDITED BY- HARLEEN KAUR




