
सनातन परंपरा और ज्योतिष में कछुए को स्थिरता, धैर्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि भगवान विष्णु ने समुद्र मंथन के दौरान कच्छप अवतार धारण कर मंदराचल पर्वत को आधार दिया था। इसी वजह से कछुए की आकृति वाली अंगूठी को भी कई लोग शुभ मानकर धारण करते हैं।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, यह अंगूठी आर्थिक स्थिरता और सुख-समृद्धि से जुड़ी हो सकती है। हालांकि, इसे पहनने को लेकर कुछ खास नियम भी बताए जाते हैं। इन मान्यताओं में दिशा, धातु और अंगुली का विशेष महत्व माना गया है।
किन लोगों के लिए मानी जाती है शुभ?
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, जिन लोगों के जीवन में बार-बार उतार-चढ़ाव आते रहते हैं या आर्थिक स्थिति में स्थिरता नहीं है, वे कछुए वाली अंगूठी पहन सकते हैं। इसे मन को शांत रखने और एकाग्रता बढ़ाने से भी जोड़ा जाता है।
हालांकि, इसे पहनने से पहले अपनी जन्मकुंडली का विश्लेषण किसी योग्य ज्योतिष विशेषज्ञ से कराने की सलाह दी जाती है।
चांदी की अंगूठी को माना जाता है शुभ
कछुए वाली अंगूठी आमतौर पर चांदी में पहनने की सलाह दी जाती है। ज्योतिष में चांदी को चंद्रमा और शुक्र से संबंधित माना जाता है। कुछ मान्यताओं में कुंडली के अनुसार पंचधातु या अष्टधातु से बनी अंगूठी का विकल्प भी बताया जाता है।
किस अंगुली में पहनें?
मान्यताओं के अनुसार कछुए वाली अंगूठी दाहिने हाथ की तर्जनी या मध्यमा अंगुली में पहनी जा सकती है। तर्जनी को बृहस्पति और मध्यमा को शनि से संबंधित माना जाता है। हालांकि, अंगूठी किस व्यक्ति के लिए उपयुक्त है, यह उसकी कुंडली और ग्रह स्थिति पर निर्भर माना जाता है।
कछुए का मुख किस दिशा में होना चाहिए?
कछुए वाली अंगूठी से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण मान्यता उसके मुख की दिशा को लेकर है। कहा जाता है कि अंगूठी पहनते समय कछुए का मुख पहनने वाले व्यक्ति की ओर होना चाहिए।
मान्यता है कि इससे धन और समृद्धि घर की ओर आकर्षित होती है। वहीं, अंगूठी को बार-बार घुमाने से बचने की सलाह दी जाती है, ताकि कछुए का मुख विपरीत दिशा में न हो।
शुक्रवार को पहनना माना जाता है शुभ
नई अंगूठी को सीधे पहनने के बजाय पहले शुद्ध करने की परंपरा बताई जाती है। इसके लिए अंगूठी को गंगाजल से साफ करके भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी के सामने रखने और धूप-दीप से पूजा करने की मान्यता है।
इसके बाद ‘ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः’ और ‘ॐ विष्णवे नमः’ मंत्र का जाप करके अंगूठी धारण करने की परंपरा बताई गई है। शुक्रवार या सोमवार को इसे पहनना शुभ माना जाता है। शुक्रवार के दिन पूर्णिमा पड़ने पर इसे और भी विशेष माना जाता है।
अंगूठी उतारते समय भी रखें सावधानी
कछुए वाली अंगूठी की नियमित रूप से सफाई करने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं में इसे धारण करने वाले व्यक्ति को मांस और मदिरा से दूरी रखने की बात भी कही जाती है।
यदि किसी कारण से अंगूठी उतारनी पड़े, तो उसे भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी के चरणों में रखने की परंपरा बताई गई है। दोबारा धारण करने से पहले उसे विधि-विधान से शुद्ध करने की सलाह दी जाती है।
EDITED BY- HARLEEN KAUR




