
आजकल कई लोग देर रात तक जागते हैं और अपनी नींद पूरी नहीं कर पाते। शुरुआत में इसका असर ज्यादा नजर नहीं आता, लेकिन रोज कम सोने की आदत से शरीर के साथ-साथ दिमाग पर भी असर पड़ सकता है। नींद पूरी न होने पर ध्यान लगाने, चीजें याद रखने, मूड और सही फैसला लेने में परेशानी हो सकती है। इसलिए अच्छी सेहत के लिए पर्याप्त और अच्छी नींद लेना बेहद जरूरी है।
ध्यान लगाने में हो सकती है परेशानी
नींद पूरी न होने पर किसी काम पर लंबे समय तक ध्यान बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। व्यक्ति रोज के काम करने में सक्षम महसूस कर सकता है, लेकिन उसका ध्यान जल्दी भटक सकता है और छोटी-छोटी गलतियां बढ़ सकती हैं।
मूड पर भी असर
लगातार कम सोने से चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है। छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा या परेशानी महसूस होना भी नींद की कमी से जुड़ा हो सकता है। पर्याप्त आराम न मिलने पर भावनाओं को संभालना भी मुश्किल हो सकता है।
फैसले लेने में दिक्कत
नींद की कमी का असर सोचने और समस्या का हल निकालने की क्षमता पर भी पड़ सकता है। ऐसे में सही फैसला लेने में सामान्य से ज्यादा समय लग सकता है या गलतियां होने की संभावना बढ़ सकती है।
कितने घंटे सोना जरूरी?
डॉक्टर के मुताबिक, नींद को सिर्फ खाली समय के तौर पर नहीं देखना चाहिए। यह शरीर और दिमाग को अगले दिन के लिए तैयार करने का जरूरी हिस्सा है। आम तौर पर वयस्कों को हर रात कम से कम 7 घंटे की नींद लेने की सलाह दी जाती है। हालांकि, हर व्यक्ति की नींद की जरूरत अलग हो सकती है। नींद की अवधि के साथ उसकी गुणवत्ता और नियमितता भी महत्वपूर्ण है।
EDITED BY- HARLEEN KAUR




