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फरीदकोट में कुएं और बोरवेल की खुदाई को लेकर जिला मजिस्ट्रेट ने जारी की सख्त हिदायतें

जिला मजिस्ट्रेट फरीदकोट राहुल चाबा, आईएएस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत प्राप्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए जिले में कुएं, बोरवेल और ट्यूबवेल की खुदाई तथा मरम्मत को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन आदेशों का उद्देश्य खुले कुओं और बोरवेल में लोगों, विशेषकर बच्चों के गिरने से होने वाली जान-माल की घटनाओं को रोकना और आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

खुदाई से 15 दिन पहले देनी होगी सूचना

जिला मजिस्ट्रेट के आदेश के अनुसार, फरीदकोट जिले की सीमा में कोई भी जमीन मालिक कुआं या बोरवेल खोदने से पहले कम से कम 15 दिन पहले जिला कलेक्टर, संबंधित ग्राम पंचायत के सरपंच, नगर परिषद, जन स्वास्थ्य विभाग और भूमि रक्षा विभाग को सूचित करेगा। कुएं या बोरवेल की खुदाई अथवा मरम्मत करने वाली सभी  सरकारी, अर्ध-सरकारी और निजी एजेंसियों का पंजीकृत होना अनिवार्य होगा।

साइट पर लगाना होगा सूचना बोर्ड

खुदाई या मरम्मत वाली जगह पर ड्रिलिंग एजेंसी और जमीन मालिक के पूरे पते वाला साइट बोर्ड लगाना अनिवार्य होगा। बोर्ड पर ड्रिलिंग एजेंसी का रजिस्ट्रेशन नंबर भी स्पष्ट रूप से दर्ज करना होगा। इसके साथ ही कुएं या बोरवेल की सुरक्षा के लिए निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन करना होगा।

बोरवेल को स्टील प्लेट से ढकना अनिवार्य

आदेशों के तहत बोरवेल के आसपास कांटेदार तार लगाकर सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। बोरवेल को स्टील प्लेट के ढक्कन से ढककर नट-बोल्ट से मजबूती से बंद करना होगा। कुएं या बोरवेल का ढक्कन केसिंग पाइप के साथ भी नट-बोल्ट से अच्छी तरह फिक्स होना चाहिए।

जमीन के आसपास बनेगा सीमेंट-कंक्रीट प्लेटफॉर्म

कुएं या बोरवेल के चारों ओर सीमेंट या कंक्रीट का प्लेटफॉर्म बनाना भी जरूरी होगा। आदेश के अनुसार यह संरचना निर्धारित माप के अनुसार जमीन के स्तर से 0.50×0.50×0.60 मीटर की होगी, जिसमें 0.30 मीटर हिस्सा जमीन के ऊपर और 0.30 मीटर जमीन के नीचे होगा।

खाली बोरवेल को खुला छोड़ना होगा प्रतिबंधित

कुएं या बोरवेल की खुदाई अथवा मरम्मत पूरी होने के बाद यदि कोई खाली जगह रह जाती है तो उसे मिट्टी से भरना होगा। खाली पड़े बोरवेल या कुएं को मिट्टी अथवा रेत से ऊपर तक भरना अनिवार्य होगा और मरम्मत के बाद जमीन का स्तर पहले की तरह किया जाएगा।

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी परिस्थिति में कुएं या बोरवेल को खुला नहीं छोड़ा जाएगा। बेकार पड़े कुएं को चिकनी मिट्टी, पत्थर, कंक्रीट आदि से नीचे से ऊपर तक अच्छी तरह भरकर बंद करना होगा।

हर महीने तैयार होगी बोरवेल की रिपोर्ट

ग्रामीण क्षेत्रों में संबंधित सरपंच और कृषि विभाग के अधिकारी अपने क्षेत्र में बोरवेल और कुओं की स्थिति की निगरानी करेंगे। शहरी क्षेत्रों में जन स्वास्थ्य विभाग, भूमि रक्षा विभाग और नगर परिषदों के जूनियर इंजीनियर तथा कार्यकारी अधिकारी अपने-अपने अधिकार क्षेत्र की रिपोर्ट तैयार करेंगे।

रिपोर्ट की एक प्रति एडीसी विकास को भेजी जाएगी

संबंधित विभाग अपनी मासिक रिपोर्ट की एक प्रति कार्यालय रिकॉर्ड में रखेंगे, जबकि दूसरी प्रति हर महीने अतिरिक्त उपायुक्त (विकास), फरीदकोट को भेजी जाएगी। अतिरिक्त उपायुक्त कार्यालय की ओर से इस संबंध में संपूर्ण रिकॉर्ड का रखरखाव किया जाएगा।

जिला प्रशासन ने इन दिशा-निर्देशों के माध्यम से खुले और असुरक्षित कुओं तथा बोरवेल से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। ये आदेश 2 दिसंबर 2026 तक प्रभावी रहेंगे।

EDITED BY- HARLEEN KAUR

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