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चना खाने का सही तरीका क्या है?

शरीर के संचालन के लिए प्रोटीन की आवश्यकता सबसे ज्यादा पड़ती है, क्योंकि यह कोशिकाओं को मजबूती और शरीर को ऊर्जा देता है।

ऐसे में महंगे सप्लीमेंट की जगह किचन में मौजूद चना प्रोटीन का एक बड़ा स्रोत है। चना एक पौष्टिक और आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर आहार माना जाता है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, और कई जरूरी पोषक तत्व होते हैं जो शरीर को ऊर्जा और ताकत देते हैं।

आयुर्वेद के अनुसार भुना चना, भीगा और पकाया हुआ चना या चने का सत्तू अलग-अलग तरीकों से शरीर को लाभ पहुंचाता है। लेकिन चना सही मात्रा और सही तरीके से ही खाना चाहिए, ताकि पाचन ठीक रहे और शरीर को पूरा फायदा मिले। ऐसे में विस्तार से जानेंगे कि कैसे और किस तरीके से चने का सेवन करना लाभकारी होता है। पहले बात करते हैं भुने हुए चने की। भुने हुए चने में कैलोरी कम और फाइबर सबसे अधिक होता है और यही कारण है कि भुना हुआ चना वजन को नियंत्रित करने में मदद करता है।

इसके सेवन से कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज और हृदय रोगों में कमी आती है। ध्यान रखने वाली बात है कि इसका सेवन सुबह और दोपहर के समय करें।

दूसरे नंबर पर आता है कि भीगा और पकाया हुआ चना। यह मुख्य रूप से काला चना होता है, जिसे रात में भिगोकर सुबह उबाल लिया जाता है। इसके सेवन से शरीर को ऊर्जा मिलती है और यह वजन बनाने में भी मददगार है। अगर आप जिम में पसीना बहाते हैं, तब शरीर को ऊर्जा देने के लिए पकाया हुआ चना सबसे अच्छा होता है। इसके साथ ही अगर चने को अलग देसी घी के साथ छौंक लगाकर पकाया जाए तो यह वात दोष को कम करने और चने के रूखेपन को भी कम करने में मदद करता है। इसका सेवन नाश्ते और शाम के समय में हल्की भूख लगने पर खा सकते हैं।

तीसरे नंबर पर है चने से बना सत्तू। चने से बने सत्तू का सेवन गर्मियों में भी किया जा सकता है, क्योंकि यह प्रोटीन से लेकर पेट को ठंडक देने का भी बेहतरीन तरीका है। इसके सेवन से थकान और नेत्र से जुड़े रोगों में कमी होती है। गर्मियों में तीनों प्रकार से चने का सेवन किया जा सकता है, लेकिन वात दोष की अधिकता से पीड़ित लोग चने के सेवन में सावधानी बरतें।

EDITED BY- HARLEEN KAUR

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