
भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान श्रीगणेश का जन्म हुआ था। इसी कारण इस दिन को गणेश चतुर्थी के रूप में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से गणपति बप्पा की पूजा करने और उन्हें प्रिय भोग अर्पित करने से जीवन में सुख-समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
गणेश जी को “विघ्नहर्ता” और “सिद्धिविनायक” के नाम से जाना जाता है। भक्त जब पूरी श्रद्धा और आस्था से बप्पा की पूजा करते हैं और उन्हें प्रिय भोजन का भोग लगाते हैं, तो उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। आइए जानते हैं कि गणेश चतुर्थी के अवसर पर भगवान गणेश को कौन-सा भोग लगाना विशेष शुभ माना जाता है।
मोदक का भोग
गणेश चतुर्थी पर सबसे पहले मोदक का भोग लगाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि मोदक गणपति बप्पा का सबसे प्रिय व्यंजन है। घर पर मोदक बनाते समय उसमें गुड़, नारियल और गेहूं या चावल के आटे का उपयोग करना शुभ माना जाता है। मोदक के मीठे स्वाद की तरह ही यह भोग भक्तों के जीवन में मिठास घोलने वाला माना जाता है।
फलों का भोग
गणपति जी को मौसमी फलों का भोग भी अत्यंत प्रिय है। खासकर आम, सेब और केले के साथ अन्य ताजे फलों का अर्पण करना शुभ फल देता है। मान्यता है कि फलों का भोग लगाने से भक्त को उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
मिठाइयों का भोग
गणेश चतुर्थी पर बप्पा को तरह-तरह की मिठाइयों का भोग भी लगाया जाता है। इनमें मोतीचूर के लड्डू, नारियल के लड्डू, तिल के लड्डू, बर्फी, जलेबी और श्रीखंड प्रमुख हैं। गणपति जी को मिठाई अर्पित करने से परिवार में धन-धान्य और खुशहाली बढ़ती है तथा रिश्तों में मिठास बनी रहती है।
भोग का महत्व
इस प्रकार गणेश चतुर्थी पर मोदक, फल और मिठाइयों का भोग लगाकर भक्त न केवल बप्पा को प्रसन्न करते हैं, बल्कि अपने जीवन में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और सौभाग्य भी आमंत्रित करते हैं। यही कारण है कि यह पर्व हिंदू संस्कृति में अत्यंत श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है।
EDITED BY- HARLEEN KAUR




