
होलिका दहन का पर्व भारतीय परंपरा में बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दिन नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति और जीवन में नई सकारात्मक ऊर्जा के स्वागत का अवसर देता है। ज्योतिष शास्त्र में भी इस दिन को विशेष महत्व दिया गया है। माना जाता है कि इस अवसर पर श्रद्धापूर्वक किए गए उपायों से ग्रह दोषों की शांति, विवाह में आ रही अड़चनों और नौकरी-व्यवसाय से जुड़ी परेशानियों में राहत मिल सकती है।
होलिका दहन 2026 का शुभ समय
वैदिक पंचांग के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा तिथि का आरंभ 2 मार्च 2026 को शाम 5 बजकर 55 मिनट पर होगा और यह 3 मार्च 2026 को शाम 5 बजकर 7 मिनट तक रहेगी। होलिका दहन 3 मार्च 2026 को किया जाएगा। होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 3 मार्च की शाम 6 बजकर 22 मिनट से रात 8 बजकर 50 मिनट तक माना गया है। इस दौरान विधि-विधान से पूजा और अग्नि प्रज्ज्वलन करना शुभ फलदायी समझा जाता है।
होलिका दहन के दिन सबसे पहले विधिपूर्वक पूजा करें। इसके बाद जलती हुई होलिका के चारों ओर 11 बार परिक्रमा करें। परिक्रमा करते समय मन में अपनी समस्याओं के समाधान और सुख-समृद्धि की कामना करें। धार्मिक मान्यता है कि 11 परिक्रमा करने से ग्रहों की अशुभता कम होती है और जीवन की बाधाएं धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं।
अग्नि में अर्पित करें ये सामग्री
परिक्रमा के बाद कुछ विशेष वस्तुएं होलिका की अग्नि में अर्पित करने की परंपरा है। इनमें शामिल हैं:
काला तिल – इसे नकारात्मक ऊर्जा दूर करने वाला माना जाता है।
हल्दी और पीली सरसों – ये समृद्धि, मंगल और शुभता के प्रतीक माने जाते हैं।
लौंग – वातावरण की शुद्धता और सकारात्मकता से जुड़ी मानी जाती है।
खीर-पूरी – सुख, संतोष और पारिवारिक खुशहाली का प्रतीक मानी जाती है।
श्रद्धा के साथ इन वस्तुओं का अर्पण करने से आर्थिक समस्याओं में राहत, कर्ज से मुक्ति और स्वास्थ्य लाभ के योग बनने की मान्यता है।
विवाह और करियर में रुकावटों के लिए उपाय
यदि विवाह में देरी हो रही हो या नौकरी-व्यवसाय में बार-बार बाधाएं आ रही हों, तो होलिका दहन के दिन किया गया यह उपाय लाभकारी माना जाता है। धार्मिक विश्वास है कि सच्ची आस्था और सकारात्मक सोच के साथ किए गए अनुष्ठान जीवन में शुभ परिवर्तन ला सकते हैं।
EDITED BY- HARLEEN KAUR




