धर्म

आज करें मां स्कंदमाता की पूजा, जानें विधि और मंत्र

चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर आज 23 मार्च, को नवरात्री के पांचवें दिन देवी दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना की जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय की माता हैं, इसलिए इनकी उपासना करने से भक्तों को कार्तिकेय की कृपा भी प्राप्त होती है।

मां स्कंदमाता को कमल के पुष्प पर विराजमान रहने के कारण पद्मासना देवी भी कहा जाता है। उनकी चार भुजाएं हैं और उनकी गोद में बाल स्वरूप में कार्तिकेय विराजते हैं, जो मातृत्व और शक्ति का प्रतीक माने जाते हैं।

शुभ योग में हो रही पूजा

इस वर्ष नवरात्र के पांचवें दिन विशेष संयोग बन रहा है। आज सर्वार्थसिद्धि योग और रवि योग का शुभ मेल है, जिसे अत्यंत फलदायी माना जाता है। यह योग रात्रि 8:49 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन सुबह तक रहेगा, जिससे पूजा का महत्व और बढ़ गया है।

पूजा का महत्व और लाभ

धार्मिक मान्यता है कि मां स्कंदमाता की उपासना से संतान प्राप्ति के योग प्रबल होते हैं और संतान से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं। साथ ही, घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।

ऐसे करें मां स्कंदमाता की पूजा

पूजा के दौरान कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना जरूरी है:

मां को पीले फूल अर्पित करें।

पीले रंग के भोग जैसे हलवा या फल चढ़ाएं।

संभव हो तो पीले वस्त्र पहनकर पूजा करें।

पूजा के अंत में संतान सुख या परिवार कल्याण की प्रार्थना अवश्य करें।

विशुद्ध चक्र से जुड़ा है संबंध

तंत्र साधना के अनुसार, मां स्कंदमाता का संबंध विशुद्ध चक्र से माना जाता है, जो कंठ क्षेत्र में स्थित होता है। इस चक्र के कमजोर होने पर वाणी दोष, गले की समस्याएं और आत्मविश्वास में कमी देखी जा सकती है।

चक्र को मजबूत करने की सरल साधना

रात्रि में शांत स्थान पर बैठें

घी का दीपक जलाएं

देवी को चंदन का तिलक अर्पित करें और स्वयं भी कंठ पर लगाएं

कंठ क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करें

108 बार मंत्र का जप करें

मंत्र जाप का महत्व

“ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे” मंत्र का नियमित जाप करने से मानसिक शक्ति, वाणी और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। साथ ही, यह साधना धीरे-धीरे विशुद्ध चक्र को संतुलित करने में सहायक मानी जाती है।

EDITED BY- HARLEEN KAUR

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!