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हरे धनिए को गर्मियों में इस तरीके से खाएं

सेहत को मिलेगा दोगुना फायदा

सर्दियों से लेकर गर्मियों में हरा धनिया अच्छी मात्रा में मिल जाता है और इसके बिना दाल-सब्जी का स्वाद भी अधूरा है। भारतीय खाने में धनिए को सजावटी तौर पर इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन यह मात्र दाल या सब्जी को गार्निश करने का साधन नहीं, बल्कि गुणों का खजाना है। आयुर्वेद हरे धनिये को ‘दोष-संतुलक,’ ‘रक्त-शोधक,’ और ‘पाचन-उत्तेजक’ मानता है। यह थायरायड में सबसे ज्यादा उपयोगी होता है।

हरे धनिए में विटामिन ए, सी, के और पोटैशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम और आयरन समेत कई मिनरल्स मिल जाते हैं। इसमें अधिक मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट भी होते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है। यही कारण है कि आयुर्वेद में हरे धनिए को गुणों की खान माना जाता है लेकिन आज भी भारतीय थाली में इसका इस्तेमाल गलत तरीके से होता आ रहा है। आज हम आयुर्वेद के नजरिए से हरे धनिए के सेवन के बारे में जानेंगे।

अक्सर भारतीय थाली में धनिए को गर्म सब्जी के साथ पका दिया जाता है, लेकिन यह गलत है। धनिए को कभी भी पकाकर नहीं खाना चाहिए, बल्कि इसका सेवन कच्चा ही करना चाहिए। पकाने से धनिए से विटामिन नष्ट हो जाते हैं और मिनरल्स की संख्या में भी कमी आती है। इसके साथ ही कोशिश करें कि धनिए को नींबू के साथ लें। ऐसा करने से शरीर में आयरन की अवशोषणता बढ़ जाती है। इसलिए दाल में कच्चे हरे धनिए के साथ नींबू की कुछ बूंदें जरूर डालें।

हरे धनिए के साथ काला नमक जरूर लें। इससे भोजन अच्छे से पचता है और मंद पड़ी पाचन अग्नि तेज होती है। पाचन अग्नि में सुधार लाने के लिए हरा धनिया और काले नमक का कॉम्बिनेशन सबसे ज्यादा बेहतरीन है। इसके साथ ही अगर सुबह के वक्त खाली पेट हरे धनिए को पानी में उबालकर और छानकर पी लिया जाए तो यह लिवर के लिए डिटॉक्स वाटर की तरह काम करता है और लिवर के टॉक्सिन को कम करने का काम करता है।

ध्यान रखने वाली बात यह भी है कि जिन लोगों को बहुत जल्दी ठंड लग जाती है, उन्हें सीमित मात्रा में धनिए का सेवन करना चाहिए क्योंकि हरे धनिए की तासीर ठंडी होती है और इससे छींक आने की परेशानी और जुकाम हो सकता है।

EDITED BY- HARLEEN KAUR

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