मटका या फ्रिज का पानी! गर्मियों में कौन सा है ज्यादा बेहतर?
जानें क्या कहते हैं हेल्थ एक्सपर्ट्स

गर्मियों में तेज धूप और बढ़ती गर्मी के बीच ठंडा पानी पीना हर किसी की पहली पसंद बन जाता है। आमतौर पर लोग या तो फ्रिज का बहुत ठंडा पानी पीते हैं या फिर पारंपरिक मटके का ठंडा किया हुआ पानी चुनते हैं। लेकिन सवाल यह है कि सेहत के लिहाज से इनमें से कौन सा विकल्प ज्यादा बेहतर है?
बहुत ठंडा पानी शरीर पर कैसे असर डालता है?
अचानक बहुत ठंडा पानी पीने से शरीर की नसों और पाचन तंत्र पर असर पड़ सकता है। खासकर गले और भोजन नली के आसपास मौजूद नसें तापमान में अचानक बदलाव पर प्रतिक्रिया देती हैं।
कुछ मामलों में यह स्थिति हृदय गति को अस्थायी रूप से धीमा कर सकती है, जिसे मेडिकल भाषा में ब्रैडीकार्डिया कहा जाता है। हालांकि यह प्रभाव ज्यादातर स्वस्थ लोगों में हल्का और थोड़े समय के लिए होता है।इसके अलावा बहुत ठंडा पानी पीने से शरीर को अपने आंतरिक तापमान को संतुलित करने के लिए अतिरिक्त ऊर्जा खर्च करनी पड़ती है। इससे कुछ लोगों को असहजता या भारीपन महसूस हो सकता है। संवेदनशील लोगों में यह गले में खराश या सर्दी-जुकाम जैसी परेशानी भी बढ़ा सकता है।
मटका का पानी क्यों माना जाता है बेहतर विकल्प?
मटके में रखा पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा होता है। यह बहुत ज्यादा ठंडा नहीं होता, बल्कि एक संतुलित तापमान पर रहता है। यही कारण है कि इसे शरीर के लिए ज्यादा अनुकूल माना जाता है। मिट्टी के मटके में पानी धीरे-धीरे ठंडा होता है, जिससे उसका तापमान शरीर के करीब रहता है। इससे अचानक तापमान बदलाव का झटका नहीं लगता और पाचन तंत्र पर भी अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता।
विशेषज्ञों की राय क्या कहती है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बहुत ज्यादा ठंडा पानी लगातार पीना हर किसी के लिए सही नहीं होता, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें पहले से दिल या पाचन संबंधी समस्या है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि फ्रिज का पानी पूरी तरह नुकसानदायक है। संतुलित मात्रा में और सामान्य ठंडा पानी अधिकतर लोगों के लिए सुरक्षित होता है।




