
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना गया है। भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और चातुर्मास के दौरान आने के कारण इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। इस वर्ष एकादशी तिथि 21 सितंबर की रात से शुरू होकर 22 सितंबर तक रहेगी। ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि आखिर व्रत किस दिन रखा जाएगा।
22 सितंबर को रखा जाएगा परिवर्तिनी एकादशी का व्रत
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल एकादशी तिथि 21 सितंबर 2026 को रात 8 बजे शुरू होगी और 22 सितंबर को रात 9 बजकर 43 मिनट तक रहेगी। चूंकि 22 सितंबर को सूर्योदय के समय एकादशी तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए उदयातिथि के नियम के अनुसार इसी दिन व्रत रखना उचित माना जाएगा। इस तरह परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 22 सितंबर 2026, मंगलवार को रखा जाएगा।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु क्षीरसागर में योग निद्रा में रहते हैं और परिवर्तिनी एकादशी पर उनके करवट बदलने की मान्यता है। इसी वजह से इस एकादशी को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।
परिवर्तिनी एकादशी पर बनेंगे ये शुभ योग
22 सितंबर को व्रत के दिन कई शुभ योग और नक्षत्र का संयोग भी रहेगा। दिन की शुरुआत रवि योग से होगी, जो सुबह 6:09 बजे से 7:06 बजे तक रहेगा। इसके बाद सुकर्मा योग शुरू होगा और रात तक बना रहेगा।
नक्षत्र की बात करें तो सुबह 7:06 बजे तक उत्तराषाढ़ा नक्षत्र रहेगा। इसके बाद श्रवण नक्षत्र का आरंभ होगा। धार्मिक दृष्टि से इन योगों और नक्षत्रों को शुभ कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
पूजा के लिए कौन सा समय रहेगा शुभ?
परिवर्तिनी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा के लिए सुबह का समय विशेष माना जा सकता है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:35 बजे से 5:22 बजे तक रहेगा। भक्त स्नान आदि से निवृत्त होकर इस अवधि में व्रत का संकल्प ले सकते हैं।
वहीं, पूजा के लिए सुबह 9:11 बजे से दोपहर 1:45 बजे तक का समय शुभ रहेगा। इस दौरान अलग-अलग शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:
लाभ-उन्नति मुहूर्त: सुबह 10:43 बजे से दोपहर 12:14 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:38 बजे तक
अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: दोपहर 12:14 बजे से 1:45 बजे तक
भक्त अपनी सुविधा और स्थानीय पंचांग के अनुसार इन समयों में भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
23 सितंबर को होगा व्रत का पारण
एकादशी व्रत का समापन अगले दिन द्वादशी तिथि में पारण करके किया जाता है। वर्ष 2026 में परिवर्तिनी एकादशी का पारण 23 सितंबर, बुधवार को किया जाएगा।
दिए गए पंचांग के अनुसार पारण के लिए सुबह 6:10 बजे से 8:35 बजे के बीच का समय बताया गया है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु पूजा-अर्चना के बाद इस अवधि में पारण कर सकते हैं।




