कब और किस दिशा में जलानी चाहिए अगरबत्ती, जानिए शास्त्रों की राय

हिंदू धर्म में पूजा-पाठ और अनुष्ठानों का विशेष महत्व होता है। आरती या पूजा के समय अगरबत्ती जलाना आज आम बात है। इसकी सुगंध से वातावरण पवित्र और शांतिपूर्ण बनता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि धार्मिक दृष्टि से अगरबत्ती का उपयोग हर समय शुभ नहीं माना जाता? शास्त्रों के अनुसार, पूजा में अगरबत्ती जलाने से जुड़े कुछ नियम और मान्यताएं हैं, जिनका पालन करना आवश्यक है।
धार्मिक ग्रंथों में धूप और कपूर का उल्लेख तो मिलता है, लेकिन अगरबत्ती का नहीं। विद्वानों का मानना है कि बांस से बनी अगरबत्तियों का उपयोग पूजा में वर्जित है, क्योंकि बांस का संबंध अंतिम संस्कार से जोड़ा गया है। शास्त्रों के अनुसार, बांस को जलाना अशुभ माना गया है, इसलिए इससे बनी अगरबत्ती का दहन धार्मिक रूप से अनुचित माना जाता है। इसी कारण शुभ कार्यों या दैनिक पूजा में बांस रहित धूपबत्ती का उपयोग करना अधिक उचित बताया गया है।
जानिए शास्त्रों की राय
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अगर पूजा के समय अगरबत्ती जलाना हो, तो हमेशा दो अगरबत्तियां जलानी चाहिए। यह घर में सुख-शांति लाती है और देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है। वहीं, चार अगरबत्तियां विशेष अनुष्ठानों में शक्ति और ऊर्जा का प्रतीक मानी जाती हैं। पूजा में हमेशा पूरी और सुगंधित अगरबत्ती ही प्रयोग करनी चाहिए, क्योंकि टूटी हुई अगरबत्ती को अशुभ माना गया है। साथ ही, अगरबत्ती जलाने के बाद उस पर फूंक नहीं मारनी चाहिए, क्योंकि यह अपवित्रता का संकेत माना जाता है।




