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ठंडे हाथ-पैर को नजरअंदाज न करें, यह हो सकता है बीमारियों का संकेत

कुछ लोगों को हाथ-पैर के ठंडा रहने या फिर सुन्न रहने की समस्या का सामना करना पड़ता है। यह शरीर के भीतर होने वाला सामान्य परिवर्तन नहीं, बल्कि शरीर की आंतरिक कमजोरी का संकेत है। इसे नजरअंदाज करना शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है।

गर्मियों में यह दिक्कत ज्यादा बढ़ जाती है, क्योंकि बाहर का वातावरण और शरीर का तापमान तो गर्म रहता है, लेकिन हाथ और पैर बर्फ जैसे ठंडे हो जाते हैं।

यह छोटा सा लक्षण शरीर की कमजोरी और रक्त संचार के बेहतर न होने का इशारा है। जब शरीर में रक्त का संचार ठीक तरीके से नहीं हो पाता है, जिसकी वजह से हाथ और पैर तक रक्त नहीं पहुंच पाता और हाथ और पैर ठंडे रहते हैं। रक्त का संचार शरीर में गर्मी पैदा करता है और तापमान को भी बेहतर बनाए रखता है। खराब पाचन भी उसके पीछे की बड़ी वजह है। शरीर में खराब पाचन की वजह से शरीर को पूरी तरह से ऊर्जा नहीं मिल पाती है और उसका सीधा असर हाथ और पैर पर देखने को मिलता है।

तनाव और कमजोरी दोनों शरीर के संतुलन और पाचन को बिगाड़ देते हैं और यही कारण है कि हाथ और पैरों तक पहुंचने वाला रक्त सही तरीके से नसों में प्रभावित नहीं हो पाता। अगर लंबे समय तक हाथ-पैर ऐसे ही ठंडे बने रहते हैं, तो इससे नसों के सिकुड़ने की बीमारी हो सकती है, जिसे मेडिकल की भाषा में रेनॉड्स रोग कहा जाता है। इस बीमारी में रक्त को संचार में मदद करने वाली नसें सिकुड़ जाती हैं और रक्त का प्रवाह बाधित होता है। इससे हाथ और पैरों में दर्द होने लगता है और वैरिकोज नसों की परेशानी भी हो सकती है।

इसके लिए कई तरह की सावधानियां बरतनी जरूरी है। इसके लिए जितना हो सके, सैर करें। इससे पैरों की तरह रक्त का संचार अच्छा बना रहेगा और पैरों में गर्मी बनी रहेगी। अगर हाथ और पैर ठंडे महसूस होते हैं तो गर्मियों में तेल से मालिश करें और सूती कपड़े में पैरों को लपेटकर गर्म करने की कोशिश करें। इससे रक्त का संचार बढ़ेगा। शरीर में आयरन और विटामिन की कमी के कारण भी हाथ और पैर ठंडे होने की परेशानी हो सकती है। इसलिए पौष्टिक आहार लें और आयरन और विटामिन से भरपूर चीजों का सेवन करें।

EDITED BY- HARLEEN KAUR

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