
सनातन धर्म में बुधवार का दिन भगवान श्रीगणेश की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले विघ्नहर्ता गणेश का स्मरण और पूजन करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा में इस्तेमाल होने वाली हर सामग्री का अपना अलग महत्व होता है। ऐसे में फूलों का चयन भी सोच-समझकर करना चाहिए, क्योंकि कुछ फूल भगवान गणेश को विशेष रूप से प्रिय माने जाते हैं, जबकि कुछ फूल उनकी पूजा में नहीं चढ़ाए जाते।
पूजा में फूल अर्पित करने का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, फूल श्रद्धा, भक्ति और समर्पण का प्रतीक हैं। माना जाता है कि भगवान को उनकी पसंद के फूल अर्पित करने से पूजा का शुभ फल प्राप्त होता है और भक्त की मनोकामनाएं पूरी होने की संभावना बढ़ती है।
भगवान गणेश को प्रिय फूल
गेंदा का फूल: गणेश पूजा में गेंदा सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले फूलों में से एक है। मान्यता है कि इसे अर्पित करने से सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और आर्थिक उन्नति का आशीर्वाद मिलता है।
गुड़हल का फूल: लाल गुड़हल भगवान गणेश को प्रिय माना जाता है। धार्मिक विश्वास है कि इसे चढ़ाने से जीवन की परेशानियां कम होती हैं, शत्रुओं पर विजय मिलती है और परिवार में खुशहाली बनी रहती है।
पारिजात, कंद और अपराजिता: पारिजात के फूल को संतान सुख की कामना से जोड़ा जाता है। कंद के फूल घर में प्रेम, शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए शुभ माने जाते हैं। वहीं अपराजिता के फूल अर्पित करने से विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होने की मान्यता है।
इन फूलों को चढ़ाने से बचें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश की पूजा में केतकी का फूल नहीं चढ़ाना चाहिए। इसके अलावा सफेद कनेर और सफेद चमेली के फूल भी गणेश पूजा के लिए उपयुक्त नहीं माने गए हैं। इसलिए पूजा के दौरान इन फूलों का उपयोग करने से बचने की सलाह दी जाती है।
EDITED BY- HARLEEN KAUR




